Thursday, November 29, 2012

बिन्सर - स्वर्ग में पांच दिन


१० अक्टूबर २०११,
 स्थान - बिन्सर, क्लब महिंद्रा
 
     चंडीगढ़ से दिल्ली फिर काठगोदाम, रानीखेत, वहां से भीमताल होते हुए बिन्सर का टैक्सी द्वारा किया हुआ सफ़र निस्संदेह शरीर की हड्डियों को चिटका रहा था, परन्तु जैसे ही हमनें क्लब महिंद्रा के  भव्य द्वार में प्रवेश किया और वहां की हरी-भरी वनस्पतियों की सुगंध हमारे नथुनों में घुसी तो मानों समस्त देह तरो ताजा हो गई हो I क्लब चारों तरफ से ऊँचे ऊँचे गुर्मेलिया, पाम तथा चीढ़ के वृक्षों से घिरा हुआ एक अलौकिक भवन दीख रहा था I दूर दूर तक छिटकी हुई हरी भरी घास और उन के किनारों पर अलग अलग रंगों के फूलों की कतारें, इन सब के पीछे बने भव्य अपार्टमेंट और दाहिनी तरफ मनोरंजन हॉल व् रेस्तरां एक अलग नज़ारा पेश कर रहे थे I यह सब देख कर सम्पूर्ण देह प्रफुल्लित हो उठी और ऐसा प्रतीत हुआ मानों हज़ारों मील यात्रा की थकावट पल भर में छू-मंतर हो गई हो I यूँ तो मैंने कुर्ग, गोवा, मशोबरा इत्यादि में स्थित क्लब महिंद्रा में खूब भ्रमण किया है, परन्तु बिन्सर का क्लब तो मानों प्रकृति की गोद में कुदरत द्वारा खुद निर्मित किया हुआ अनोखा घर हो I यहाँ घूमने का आनंद तो है ही परन्तु रहने का अनुभव तो बिलकुल अलग है I  


चारों तरफ पर्वत मालाओं से घिरा बिन्सर एक खामोश, शांत परन्तु हल्के हल्के रोमांच को देने वाला अविस्मर्णीय स्थान है I शहर के शोरगुल से एकदम दूर बिन्सर घाटी को घंटों निहारने के पश्चात भी आत्मा तृप्त नहीं होती, लगता है मानों समय ठहर गया हो और मन को परम शांति मिल रही हो I गगनचुम्बी पर्वतों  पर लहलहाते हरे भरे जंगल और उनके शिखरों पर श्वेत बर्फ और उन सब पर नीला गगन व् गगन के सीने पर आवारा मंडराते हुए बादलों के टुकड़े - ऐसा प्रतीत हो रहा था मानों किसी कलाकार ने कैनवस पर सम्पूर्ण कुदरत को उतार दिया हो I यह समस्त दृश्य क्लब महिंद्रा के द्वितय भाग जो कि केंद्रिय क्लब महिंद्रा से एक या दो किलोमीटर की दूरी पर पर्वत शिखर पे स्थित है, से दिखाई दे रहा था I

 
        अगला दिन रोमांच से भरपूर और सम्पूर्ण देह को ताज़गी देने वाला सिद्ध हुआ I हम लोग सूर्य उदय से पहले ही तैयार थे I क्लब महिंद्रा के रेस्तरां में स्वादिष्ट व्यंजनों का नाशता करने के उपरांत हमने टैक्सी से सीधे बिन्सर सुरक्षित वन स्थल(Binsar Sanctuary) की तरफ प्रस्थान कर दिया I सर्प के समान टेढ़ी मेढ़ी सड़क और दाहिनी तरफ सैंकड़ो फुट गहरे खड्डे एक सिहरन का एहसास करा रहे थे I लेकिन मन में गंतव्य पर पहुंचने की व्याकुलता ने हर डर को समाप्त कर दिया था I अंततः हम सुरक्षित वन स्थल में पहुँच ही गए I यहाँ पर प्रकृति की छटा देखने को ही बनती थी I अजीब अजीब पक्षियों की मधुर कलरव ध्वनि एक अलौकिक संगीत को वातावरण में बिखेर रही थी और हम मन्त्र-मुग्ध से आगे चलते जा रहे थे I ऊँचे ऊँचे वृक्षों के कारण वातावरण में अँधेरा सा छाया हुआ था I वन की सघनता से सब कुछ रहस्मय प्रतीत हो रहा था I किसी खरगोश या हिरन की चहल पहल से ख़ामोशी टूट जाती थी I परन्तु हम व्याकुल निगाहों से वातावरण की गंभीरता को देख देख कर प्रसन्न हो रहे थे I

        सुरक्षित वन के बाहर के आलौकिक दृश्य ने हम सब को हतप्रभ सा कर दिया और हमें यूँ महसूस हुआ मानों हम धरती के एक अलग स्वर्ग में खड़े हैं I दूर दूर तक हरी भरी घास का ऊँचा नीचा मैदान, या यूँ समझिये की घोड़ों का चारागाह (Meadow) और इस मैदान के अंत में घने जंगलों का विस्तार - दुनियां में ऐसे नज़ारे बहुत कम स्थानों में ही होते होंगे. मानव के चक्षु और प्रकृति की छटा, यह एक अनोखा संगम था जिसे हम कभी नहीं भूल सकते I

     
बिन्सर में बिताये पांच दिन हमारे जीवन के अमूल्य क्षण थे I इन पांच दिनों में हमनें जोगेश्वर मंदिर, गण नाथ मंदिर, भीमताल व् नैनीताल और अन्य दिलचस्प स्थानों को देख कर उन्हें अपनी यादों में हमेशा के लिए कैद कर लिया I वापसी पर हम समस्त बिन्सर को चक्षुओं में भर लेना चाहते थे I हम तो वापिस आ गए परन्तु हम अपनी यादों के पद-चिन्ह वहीँ छोड़ आये थे I दुबारा गए तो उन्ही पद-चिन्हों को खोजने का प्रयत्न अवश्य करेंगे !      

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